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आपका नूर

17 Sep
शबनम को शोला बनाना शायद आपका दस्तूर है 
कहेंगे नहीं ज़ालिम तुम्हे, इस अदा में भी आपका नूर है

बेमदद मरीज़

17 Sep
इश्क़ में ज़ख़्मी हो कर जी रहा ये बेमदद मरीज़ 
इश्क़ कि दवा पिलादे हमें बनाकर अपना अज़ीज़

मेरी सीरत नहीं

17 Sep
प्यार को निभाने की आदत छोड़ दी तुमने 
पर तुम्हे ज़ालिम केहना मेरी सीरत नहीं 
इलज़ाम तो हम भी दे सकते है 
पर इतनी ज़ुल्मी तेरी सूरत नहीं 

आलम-ए-दर्द

17 Sep
हर शेर हमारा आज ख़ास है
आलम-ए-दर्द का जो एहसास है
इसे मिटने की आस मत रखियो
दर्द से ही निकलती मेरी हर साँस है 

ज़ुल्म-ए-उल्फत

17 Sep
ज़ुल्म-ए-उल्फत की सज़ा काँट रहा हूँ 
टूटे दिल के टुकड़े जमा रहा हूँ 
किसी को ऐसी सज़ा न मिले 
ये टुकड़ों को लेकर यही दुआ मांग रहा हूँ 

ख़ास वजह चाहिए

17 Sep
मेरी शायरी को हसीन मकाम चाहिए 
किसी के दिल में ख़ास जगह चाहिए 
अगर मर भी गए तो गम नहीं 
मरने के लिए ख़ास वजह चाहिए 

हैसियत ही कहा

17 Sep
इश्क़ की कदर न करो तुम,
तेरी हैसियत ही कहा उसे समझने की 
हम तो सही समझे इश्क़ को 
पर मेरी हैसियत ही कहा उसे पाने की